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विध्यालय की हालत जर्जर , बच्चों के साथ घटना घटने की आशंका

हिंडौन ( करौली ) । डिजिटल इंडिया के दौर में भी बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर है । हिंडौन के गांव कोटरा ढहर मे स्थित राजकीय प्राथमिक विध्यालय की स्थिति नाजुक बनी हुई है बच्चे खुली आसमान के नीचे बैठने को मजबूर है जर्जर कमरों की छत गिरने का भय हमेशा बना रहता है ।


विध्यालय मे आठवीं तक कक्षाएँ संचालित है व कुल आठ कमरे है जिनमें से चार जर्जर कमरे है जिनके गिरने की शंका बनी रहती है चार नये कमरे भी है जिनमें एक में रसोई का सामान रखा रहता है और एक में विध्यालय का कबाड़ पडा रहता है और दो बचे कमरों मे 211 बच्चों को बैठाना मुश्किल ही काम है इसलिए बच्चों को जर्जर कमरों मे बैठाया जाता है । बरसात के दिनों में छत गिरने की शंका बनी रहती है बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ महंगा पड़ सकता है । 


विध्यालय के प्रधानाध्यापक का कहना है की गांव के सरपंच को प्रस्ताव देकर अवगत करा दिया गया है लेकिन कुछ नही हुआ है व सरपंच का कहना है की यह कार्य हमारे अधीन नही आता है । ऐसे में बच्चों को खुले आसमान के नीचे शिक्षा देना विध्यालय प्रबंधन की मजबूरी है । 


शिक्षा अधिकारी का कहना है की बजट नही है - 

सामजिक कार्यकर्ता नेमी चंद मीना ने विध्यालय की स्थिति के बारे में जिला कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है की उनसे पास बजट नही है ।

मुख्यमंत्री को भी किया ईमेल -

समाजिक कार्यकर्ता नेमिचंद मीना ने बताया की विध्यालय की स्थिति के बारे मे मुख्यमंत्री को ईमेल भेजकर अवगत कराया गया है लेकिन उनके तरफ से अभी तक कोई जवाब नही आया है ।

घटना का जिम्मेदार कौन -

टूटी-फूटी छतों के गिरने से अगर कोई घटना घट जाती है तो ऐसे में बच्चों के साथ होने वाली घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा ? शिक्षा मंत्री , जिला कलेक्टर या मुख्यमंत्री !



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